क्यू इंदिरा गांधी ने आजाद भारत मे 1975 में इमरजेंसी लगाई थी? - जानिए पूरी कहानी


25 जून 1975 आपको याद होगा जिसे काले दिन के रूप में मनाया जाता है। 25 जून 1975 को ही इंदिरा गांधी ने आजाद भारत में पहेली बार इमरजेंसी लगाई थी।

इमरजेंसी मतलब भारत में रहने वाले प्रत्येक इंसान के सभी अधिकार खत्म हो जाते है। जिसमे बोलने की, चलने की, सभी अधिकारिकता खत्म हो जाती है और सरकार जो कहे उसका पालन करना होता है। आपने इमरजेंसी का नाम तो सुना होगा पर इमरजेंसी क्यु लगी थी इसके पीछे का कारण जानिए।

क्यू इंदिरा गांधी ने आजाद भारत मे 1975 में इमरजेंसी लगाई थी? - जानिए पूरी कहानी


जानिए क्यू इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी

इमरजेंसी क्यों लगी उसके पीछे की वजह ये थी कि एक लोकसभा की सीट बचानी थी और Prime Minister की कुर्सी खाली नही करनी थी इसलिए इमरजेंसी लगा दी गई।

1971 में इंदिरा गांधी चुनाव प्रचार में उतरी ओर बड़े पैमाने पर प्रचार करती रही। इसकी वजह से वो 1971 में चुनाव जीत जाती है और 518 मेसे 352 सीट Congress को मिलती है। उसमें से इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ी थी और उसके सामने राज नारायण चुनाव में उतरे थे पर राज नारायण इन्दिरा ग़ांधी से 1 लाख वोट हार जाते है।

उसके बाद राज नारायण कोर्ट में केस कर देते है कि Indira Gandhi अपने सरकारी तंत्र का Missuse यानी धांधली  करके से गलत तरीके से चुनाव लड़ी है और तय खर्च से ज्यादा खर्च चुनाव प्रचार में किया है और उसके सेक्रेटरी को चुनावी केम्पेन का हिस्सा बनाया है। क्यूंकि सेक्रेटरी सरकारी पद होता है इसलिये वो पार्टी का केम्पेन नही संभाल सकते। वह सिर्फ सरकारी पद पर Indira Gandhi के सेक्रेटरी थे नाकि पार्टी के पद पर थे।

कोर्ट में ये सारे मामले सही साबित होते है इसलिए इलाहाबाद हाई कोर्ट 1975 को फैसला सुनाती है की इस लोकसभा की सीट को खारिज किया जाए और 3 हफ्ते में Congress चुन ले की वह किसे Prime Minister बनाना चाहती है क्योंकि इंदिरा गांधी Prime Minister नहीं रह सकती और उसके साथ ही कोर्ट ने इंदिरा गांधी पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी।

Congress में हड़कंप मच गया और पूरा  विपक्ष भी एक हो कर Congress को के खिलाफ आंदोलन करने लगा जिसके लीडर जयप्रकाश नारायण थे और इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग करने के लिए आंदोलन करने रास्ते पर उतर पड़े। इसलिए इस आंदोलन का नाम J.P. आंदोलन रखा गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के ठीक 11 दिन बाद इंदिरा गांधी  सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती है। 

24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट  सुनवाई देती है कि जब तक कोर्ट का कोई फैसला नहीं आता यानी केस का फैसला नहीं आता तब तक आप Prime Minister बनी रह सकती है पर आप किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकती। जब कोई  PM बनता है तो उसे 6 महीने में राज्यसभा का मेंबर बनना पड़ता है इसके लिए चुनाव होता है पर चुनाव पर रोके लगा दी गई इसलिए Indira Gandhi चुनाव नहीं लड़ सकती। जाहिर सी बात है कि यह फैसला Congress और इंदिरा गांधी के हक में नहीं था।

फिर 25 जून 1975 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद इंदिरा गांधी एक फैसला लेती है जिससे वह Prime Minister भी बनी रहे और उसकी खुर्सी भी न जाए। वह फैसला लेती है कि पूरे देश मे Emergency लगाई जाए और  यह सुजाव उनके के सेक्रेटरी ने ही Indira Gandhi को दिया था। अभी इंदिरा गांधी अपने सेक्रेटरी के फैसले को सही मानती है और इंदिरा गांधी राष्ट्रपति के पास पहुंच जाती है और कहती है कि विपक्ष देश में आंदोलन के नाम पर दंगा फैला रहा है इसलिए पूरे देश मे Emergency लगाई जाए। 

हालांकि विपक्ष सिर्फ Indira Gandhi के इस्तीफे के लिए ही आंदोलन कर रहा था। इमरजेंसी लगने के पहले ही बड़ी चुपचाप से जे.पी नारायण जो J.P आंदोलन के Leader थे, लालकृष्ण आडवाणी को, अटलबिहारी वाजपेई को बड़ी खामोशी से गिरफ्तार कर लिया जाता है उसके साथ आंदोलन के बड़े नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया  जाता है और ये बात फैले नही उस बात का ध्यान रखा जाता है।

उसी रात को ही Indira Gandhi के बेटे संजय गांधी सभी स्टेट के CM और बड़े अफसर को फोन करके कहता है कि बीते दिन जो धारणा करे वह सब नेता को गिरफ्तार किया जाए। ऐसे ही रातों-रात सब नेता को खामोशी से गिरफ्तार किया जाता है। तभी प्रेसिडेंट ने इमरजेंसी लगाने को ग्रीन सिग्नल दे दिया, उसके बाद इंदिरा गांधी रेडियो के जरिए ऐलान करती है कि देश में इमरजेंसी लगाई गई है और ये Emergency आपके हित के लिए है। सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया था उसकी खबर फैले नही इसलिये प्रिंट मीडिया के दफ्तर की लाइट काट दी जाती है जिससे पेपर छपे नहीं और खबर फेले नही और अगर किसी भी तरह वो खबर छपेगा तो उसे जेल में दाल दिया जाएगा ऐसी धमकी भी मिली थी।

उसके बाद कई नेता सरकार के खिलाफ कोर्ट में भी गए  लेकिन कोर्ट को भी नहीं बख्शा गया। जो जज  सरकार की बात नहीं मानता था उसको ट्रांसफर कर दिया गया और उनकी जगह सरकार की बात माने ऐसे जज को खुर्सी पर बिठाया गया मतलब देश का न्यायतंत्र भी सरकार के पास था।

मीडिया को भी साफ शब्दों में कह दिया गया कि नेता की गिरफ्तारी की खबर आप नहीं छाप सकते और नहीं दिखाएंगे और सिर्फ सरकार के आदेश पर दिए गए सभी समाचार छापे जाए और दिखाया जाए। गरीब लोगों को अच्छी जगह पर रहने के नाम पर उनकी झोपड़ियों को हटवाया गया। पॉपुलेशन कंट्रोल के नाम पर लगभग 9 लाख लोगों को जबरन नसबंदी कर दी गई। इसके पीछे का विचार इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी था। उस वक़्त PM Indira Gandhi थी पर सभी  नियम  बनाने वाला  उसका बेटा संजय गांधी ही था। यहां तक कि उस पर चल रहे केस के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में बदल ने की कोशिश की गई। इमरजेंसी का जो विरोध करता था उसे जेल में दाल दिया जाता था और लोगो पर बडे जुल्म किये जाते थे।

Emergency 21 महीने चली तब तक एक सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे सरकार द्वारा लोगो पर जुल्म हुवा और आखिर में Indira Gandhi को 21 महीने बाद लगा की अब विपक्ष की आवाज दब गई है इसलिए विपक्ष नाम की कोई चीज नही है, और चुनाव होगा तो वह बड़े आराम से जीत जाएंगे और फिर से PM बन जाएंगी। इसलिए 23 मार्च 1977 की इमरजेंसी समाप्ति की घोषणा करती है। 

फिर 1977 में  ही चुनाव होता है क्योंकि जनता के मन में इमरजेंसी को लेकर इंदिरा गांधी और सरकार के प्रति इतना गुस्सा था उन पर बीते दमन का बदला लेना था इसलिए 1977 में इंदिरा गांधी और Congress पार्टी बुरी तरह से चुनाव हार जाती है, और इंदिरा गांधी जीस लोकसभा की सीट को बचाने के लिए और PM की कुर्सी पर बने रहने के लिए इमरजेंसी लगाई थी उसी सीट पर वह बुरी तरह से हार जाती है। 

उसके बाद जनता पार्टी की सरकार बनती है और मोरारजी देसाई PM बनते हैं। क्योंकि यह सरकार अलग अलग दल मिलकर चला रहे थे इसलिए आपसी मतभेद के कारण यह सरकार 2 साल में ही गिर जाती है। उसके बाद फिर चुनाव होता है इसमें इंदिरा गांधी और Congress की जीत होती है और फिर से Indira Gandhi Prime Minister बन जाती है।

इस तरह Emergency की समाप्ति होती है इसके बाद चुनाव में हारने वाली Indira Gandhi 2 साल बाद 1979 में फिर Prime Minister बन जाती है और 1984 तक PM बनी रहती है उसके बाद उसकी हत्या हो जाती है।

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