Kargil Vijay Diwas: जानिए क्यू कारगिल हुवा था और कैसे हमने उस जंग में विजय हासिल किया

आज 26 जुलाई यानी Kargil Vijay Diwas है। जिसे हम जीत कर तिरंगा लहराया था और उस जंग में हमारे 500 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे।

Kargil Vijay Diwas: जानिए क्यू कारगिल हुवा था और कैसे हमने उस जंग में विजय हासिल किया


जानिए क्यू कारगिल हुवा था और कैसे हमने उस जंग में विजय हासिल किया

1998 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हुवा करते थे और उसकी आर्मी चीफ से कही मुद्दे पर बन नही रही थी इसलिये आर्मी चीफ अपने पद से इस्तीफा दे देता हैं।तभी नवाज शरीफ परवेज़ मुसर्रफ को आर्मी चीफ बनाता है।ये वही परवेज मुसर्रफ था जिसने बाद में नवाज शरीफ को तखते से हटाता है और खुद प्रधानमंत्री बन जाता है और जिसे अभी फांसी की सजा मिली हुवी है।

1998 में परवेज़ मुसर्रफ जब आर्मी चीफ बनता है तभी उसके मन मे चल रहा था कि किसी भी तरह से जम्मू-श्रीनगर हाइवे को डिस्टर्ब करना है क्यूंकि वही एक रास्ता है जहाँ से आर्मी की जरूरी सामग्री आ जा सकती है।

परवेज मुशर्रफ 1998 से 1999 तक पूरा प्लान बना चुका था की कैसे हम हिंदुस्तान पर हमला करेंगे।लेकिन हमारी IB, RAW, इंटेलिजेंस को भनक तक नही लगने दी और देखते ही देखते मुजाहिदीन और लशकर के 5000 आतंकवादी को पाकिस्तानी आर्मी के यूनिफॉर्म में कारगिल की पहाड़ी पर भेज चुका था और उसका पता हमारी आर्मी को नही चला।

2 may 1999 के दिन एक चरवाहा अपने भेड़ को चराने के लिए निकलता है तभी इसका याक चरते चरते कही चला जाता है तो वो चरवाहा उसे ढूढने के लिए इधर उधर देखता है और ऊंची पहाड़ी पर भी चढ़ता है। तभी देखके हैरान हो जाता है बड़ी तादात में पाकिस्तानी सेना को  यूनिफॉर्म में देखता है और सीधा भागकर नजदीकी आर्मी पोस्ट पर जाके बताता है । मतलब पाकिस्तान यूनिफॉर्म में 5000 लोग बॉर्डर की तरफ आ रहे थे वो एक चरवाहा की मदद से पता चला।

वहां से बड़े अफसर तक बात जाती है ओर आर्मी chopar से निगरानी के लिए की जाती है पर तब तक वो सब पहाड़ी में छुप चुके थे इसलिए कोई नजर नही आता है। फिर अगले दिन आर्मी के कुछ जवान search ऑपरेशन में निकल पड़ते है तभी 5 जवान पाकिस्तानी आर्मी के हाथ मे चढ़ जाते है और वो सीधा हमला कर देते है इसमें हमारे 5 जवान शहीद हो जाते है।

तभी पता चलता है कि बड़ी तादात में पाकिस्तानी आर्मी को लोग कारगिल पहोच चुके है। 3 may 1999 को आमने सामने की लड़ाई शुरू हो जाती है। एयरफोर्स की भी मदद ली गई और उसमें एक mig को आतंकवादियो ने गिरा भी दिया। 

War के शुरू में हमें जिस तरह से जंग लड़नी चाहिये थी उस तरह से हम नही लड़ पाए क्योंकि वहा की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि हमारे दुश्मन पहाड की ऊँचाई पर है और हम नीचे है इसलिए जाहिर सी बात है कि वो ऊपर से सारी गतिविधियों को देख सकते थे। इसलिये एक आतंकवादी की कंट्रोल करने में हमें करीबन 27 जवान की जरूरत पड़ रही थी।

वह आतंकवादी 8 km तक बॉर्डर के अंदर घुस आये थे। ये युद्ध 2 महीने तक चला फिर पाकिस्तानी सेना परास्त हुवी और हमारे वीर जवान की मदद से हम 26 जुलाई 1999 को तिरंगा फहराया ओर युद्ध मे जीत हासिल की उसमे हमारे 527 जवान शहीद हुए और 1363 घायल हुए। इसलिए इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस लड़ाई में पाकिस्तान मुजाहिदीन और लशकर के आतंकवादी के नाम पर पाकिस्तान आर्मी को जंग में उतारा ताकि इसमे कहि  पाकिस्तान आर्मी का नाम न आये और दुनिया को लगे कि आतंकवादी आपनी मांग के लिए युद्ध लड़े।

पाकिस्तान की ये घिनोनी हरकत दुनिया के सामने लाने के लिए CIA और Mosad जैसी खुपिया एजेंसी की मदद ली गई। एजेंसी ने पाकिस्तान में फोन tap किया जब कारगिल युद्ध चालू था तब परवेज मुशर्रफ China के दौरे पर था। पाकिस्तान आर्मी के बड़े अफसर और परवेज़ मुसर्रफ की बातचीत को Record कर लिया। जिसमे वो आर्मी का बड़ा अफसर परवेज़ मुसर्रफ को साफ साफ बोल रहा था कि हमने उनका Chopar गिरा दिया है जिसमें हिन्दुस्तान को भारी नुकसान हुवा है। 

तभी के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हुवा करते थे उन्होंने ये रेकॉर्ड की गयी आवाज को मीडिया में प्रसारित करने का एलान कर दिया और फिर दुनीया को पता चल गया की ये कोई आतंकी हमला नही था पर पाकिस्तान आर्मी की घिनोनी हरकत की साजिस थी।

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